प-वर्ग (प फ ब भ म)
कुल 452 भजन
प (123)
- पंखिडा… ओ… पंखिडा…
- पंखिड़ा रे उड़ के आओ कुण्डलपुर में
- पंच परम परमेष्ठी भगवन् जिसके है रखवाले
- पंच परमेष्ठी मंगल पंचक स्तोत्र
- पंच परमेष्ठी वन्दना
- पंचकल्याण मनाओ मेरे साथी
- पंचकल्याणक आऐ
- पंच(पञ्च) परम परमेष्ठी देखे
- पंच-परम पद मंगलकारी, भव्य भजो नित ही सुखकारी
- पंच-परमेष्ठी प्रभु सार, इस असार संसार में
- पंचपरमेष्ठी स्तुति
- पंच-महागुरु-भक्ति (आ. कुन्दकुन्द स्वामी)
- पञ्च परम गुरूओं ने गाया
- पद्मसद्म पद्मापद पद्मा
- पधारो पलक झरोखे वीर
- परणति सब जीवन की
- परनति सब जीवन की
- परम उपकारी जिनवाणी
- परम गुरु बरसत
- परम दिगम्बर मुनिवर देखे
- परम पदने पामवा
- परम प्रभु अन्तर में निरखे, आनंद भयो अपार रे
- परम प्रभु निज माँहि निहारा, आनंद उर न समाय रे
- परम सौभाग्य है जिनवर, दर्श आनंदमय पाया
- परमातम तेरा तारण हार
- परमातम परमातम
- परमेष्ठी मुझको तुम वर दो
- परिणति भी होवे तुम सम ही महावीर-महावीर
- पर्व अठाई आया है
- पर्व दशलक्षण मंगलकार
- पर्व दशलक्षण मंगलकार
- पर्वराज पर्यूषण आया दस धर्मों की ले माला
- पल पल बीते उमरिया रूप जवानी
- पाऊँ हो सुखकार, धर्म जिनेश्वर पाऊँ हो
- पाना नहीं जीवन को
- पानी में मीन पियासी
- पानी में मीन पियासी
- पाने योग्य स्वयं में पाया, व्यर्थ न भव में भरमाऊँ
- पाप मिटाता चल ओ बंधू
- पापन सो नित डरिये
- पाया जिनागम सार, भक्ति से नमन करें
- पाया मंगल जिनशासन, पालेंगे हम अनुशासन
- पाया मंगलमय जिनधर्म, समझो सत्य तत्त्व का मर्म
- पायो-पायो रे शरण सुखकार, जिनेश्वर चरणों में
- पारस जिन चरन निरख, हरख यों लहायो
- पारस नाथ जी सम्मेदाचाल जाएं, कि अब बारी हमरी है
- पारस प्यारा लागे, चवलेश्वर प्यारा
- पारस प्यारा लागो
- पारस प्रभु का दर्शन
- पारस प्रभु को नाऊँ, सार सुधारस जगत में
- पारस प्रभु साँचे उपकारी, पारस प्रभुवर नित अविकारी
- पारस रे तेरी कठिन ड़गरिया
- पारसनाथ-पारसनाथ, दर्शन पाये पारसनाथ
- पारस-पद-नख प्रकाश, अरुन बरन ऐसो
- पार्श्व प्रभो तव दर्शन से
- पालकी उठाने का हमें अधिकार है
- पावन हो गई आज ये धरती
- पावापुर भवि वंदो जाय
- पास अनादि अविद्या मेरी, हरन पास परमेशा है
- पिया बिन कैसे खेलूँ होरी
- पुद्गल का क्या विश्वासा
- पुलकन्त नयन चकोर
- पुलकन्त नयन चकोर पक्षी
- पूजें अकृत्रिम जिनमंदिर, पूजें अकृत्रिम जिनबिम्ब
- पूर्व दिशा सम जननी जिनेश्वर
- प्यारी लागै म्हाने जिन छवि थारी
- प्रभाती (कविवर दौलतराम)
- प्रभु आदर्श रहो
- प्रभु आदीश्वर गुण गाऊँ मंगलकारी
- प्रभु आप सा कोई दाता नहीं है
- प्रभु इंतजार उनका..गुरु भक्ति
- प्रभु की वीतराग जिनमुद्रा
- प्रभु के आने की आहट
- प्रभु को देखें भक्ति उल्लसे
- प्रभु गुन गाय रै, यह औसर फेर न पाय रे
- प्रभु जी अब न भटकेंगे संसार में
- प्रभु जी पधारे म्हारे आँगणे
- प्रभु जैसा ही ध्यान लगावें
- प्रभु ज्ञायक का ही अनुभव होगा, कि अन्तर्दृष्टि रहे
- प्रभु तुम चरन शरन लीनौं
- प्रभु तेरी महिमा
- प्रभु थांको लखि मम चित हरषायो
- प्रभु थारी आज महिमा जानी
- प्रभु थारी आज महिमा जानी I Prabhu Thari Aaj Mahima
- प्रभु दर्शन कर चाह जगी
- प्रभु दर्शन कर जीवन की
- प्रभु दर्शन की मंगल बेला
- प्रभु नाम का सुमरन कर ले, पाया अवसर सुखदानी
- प्रभु निर्ग्रन्थ स्वरूप निरखते, सहज शीश झुक जावे
- प्रभु पार्श्वनाथ की जय बोलो
- प्रभु पै यह वरदान
- प्रभु बाहुबली जय-जय-जय-जय
- प्रभु भक्ति आनंदमय, गुरु भक्ति आनंदमय
- प्रभु मोरी सुध करुणा कर लीजे
- प्रभु यही भावना होती है’
- प्रभु यही भावना होती है, निर्ग्रन्थ दशा मंगलमय हो
- प्रभु रूप लखत मेरे सुमति भयी
- प्रभु विनति लेकर आये हैं
- प्रभु वीतराग पद वंद्य रे
- प्रभु शांत छवि तेरी
- प्रभु शान्त रूप सुखदाई, अद्भुत प्रभुता झलकाई
- प्रभु सम नहीं कोई उपकारी
- प्रभु सहज भावना है, जीवन सहज-सहज हो
- प्रभु ! स्वाश्रित जीवन हो, स्वानुभवमय जीवन हो
- प्रभु हम सब का एक
- प्रभुजी, मन मंदिर में आओ
- प्रभुजी मन मंदिर में आओ
- प्रभुता प्रभु की मंगलकारी
- प्रभुवर अन्तर्मुख हो जाऊँ
- प्रभुवर ऐसी दीवाली मनाऊँ
- प्रभुवर का निर्वाण दिवस
- प्रभुवर चरणों के प्रसाद से
- प्रभुवर जाननहार हो, मैं भी जाननहार
- प्रभुवर तुम साक्षी अहो, पाऊँ पद अविकार
- प्रभुवर दर्शन तेरा रे
- प्रभुवर ये ही भावना, मगन रहूँ निज माँहि हो
- प्रभुवर ! संयम कब प्रगटे
- प्रभो ! निवार्च्छक तृप्त रहूँ
- प्राणीलाल ! धरम अगाऊ धारौ
- प्राणों से भी प्यारा है, तीरथ हमारा
- प्रानी समकित ही शिवपंथा
- प्रेम अब त्यागहु पुद्गल का
- प्रेम जब अनन्त हो गया
फ (1)
ब (42)
- बंधनवार सजाओ सखी
- बजे कुण्डलपर में बधाई
- बड़ी भक्ति से पूजा करिये, करिये प्रभु गुणगान रे
- बड़ी भली जिनवाणी माँ, तत्त्वामृत पान कराती है
- बड़े भाग्य से हमको मिला जिनधरम/जिनधर्म
- बढ़े चलो
- बधाई आज मिल गाओ
- बधाई गाओ रे! …अयोध्या चालो रे
- बनारस में बज रही बधइयां
- बनारसी दास जी कृत निमित्त - उपादान दोहा
- बने जीवन का मेरा आधार रे
- बनें महान
- बन्धनों में मुक्त को स्वीकार करता हूँ
- बन्यौ म्हांरै या घरी मैं रंग
- बरस रहा अमृत रस अँगना
- बरसत ज्ञान सुनीर हो, श्री जिनमुख-घन सौ
- बसि, संसार में मैं पायो दुःख अपार
- बहता आनंद रस का झरना
- बहती आनंद रस की धारा
- बहे अमृत धार देखो
- बाजे कुण्डलपुर में बधाई
- बाज्यो रे ढोल
- बाबा ! मैं न काहू का
- बार बार श्री गुरु समझाएं
- बारह भावना
- बाल ब्रह्मचारी प्रभो ! नेमीश्वर महाराज
- बाल भावना
- बाहर से मीचो आँख रे
- बाहुबलि स्वामी ! दर्शन की बलिहारियाँ
- बाहुबली जय बाहुबली
- बाहुबली भगवान
- बाहुबली स्वामी ! वन्दूँ मैं बारम्बार
- बाह्य जग के दृश्य न देखूँ, जिन दर्शन कर तृप्त रहूँ
- बाह्याचार विधान कहे, चरणानुयोग सुखकारी
- बीरा! थारी बान परी रे, बरज्यो मानत नाहिं
- बुधजन पक्षपात तज देखो
- बेला अमृत भरा, वक्त क्यों खो रहा
- बोलो जय जयकार
- बोलो जय-जयकार, जिनवाणी सुखकार
- बोलो वर्धमान भैय्या
- बोलो-बोलो-बोलो भाई, वीर प्रभु जय बोलो
- ब्रह्मचर्य स्तुति
भ (53)
- भंडार भरा चेतन राजा का
- भक्तामर महिमा (कौशल)
- भक्ति के उठे सरगम
- भक्ति प्रभु की कर लो, यह अवसर आया है
- भक्ति भाव से पूरित हो हम, महावीर गुण गायेंगे
- भक्ति श्री जिनराज की कर लो अवसर आया है
- भक्ति से मुनिवर नमन करूँ
- भगवन्त भजन क्यों भूला रे
- भगवन्त भजो, भव-अन्त लहो, समभाव धरो, सुख रूप रहो
- भगवान आत्मा आनंद भंडार
- भगवान आत्मा, भगवान आत्मा
- भगवान महावीर के प्रति(तुम्हें जानकर जग)
- भज ऋषिपति ऋषभेश, ताहि नित नमत अमर असुरा
- भजन बिन यौं ही जनम गमायो
- भजन श्री महावीर स्वामी (चांदनपुर)
- भटके हुए राही को
- भरतजी घर में ही वैरागी
- भरे हुए हैं सिद्धों के गुण, सिद्धचक्र के पाठ में
- भरोसा क्या जिन्दगानी का
- भली भई यह होरी आई
- भले रूठ जाये(बस एक वीतरागी को)
- भले विराजे बाहुबली प्रभु ! भले विराजे जी
- भलो चेत्यो वीर नर तू, भलो चेत्यो वीर
- भव दु:ख से बचने का
- भव भव रुले हैं
- भवदधि-तारक नवका जगमाहीं जिनवान
- भववनमें, नहीं भूलिये भाई
- भवि कहना गुरु का मान, समझ शुद्धातम हूँ
- भवि देखि छवि भगवान की
- भविजन काहे को मोह करे
- भविजन ! बिन विवेक मत खोओ
- भविन-सरोरूहसूर भूरिगुनपूरित अरहंता
- भाई ! अन्तर उज्जवल करना रे
- भाई ! अब मैं ऐसा जाना
- भाई आपन पाप कमाये आये
- भाई कौन कहै घर मेरा
- भाई ! ज्ञान का राह सुहेला रे
- भाई ! ज्ञानी सोई कहिए
- भाखूं हित तेरा, सुनि हो मन मेरा
- भाया थारी बावली जवानी
- भावना की चुनरी
- भावना की चूनर ओढ़ के
- भावे भजो जिनराया
- भावों में सरलता रहती है
- भूधर जैन शतक
- भूलकर/भूल के अपना घर
- भूला है स्वयं आत्मा को
- भेद विज्ञान जग्यो जिन्हके घट
- भैया ! जगा रही जिनवाणी, अब तो पहिचानो निज रूप
- भैया मेरे सम्यक् रतन सम्भालो
- भो आत्मन् ! तजो विकल्प सभी
- भोगे तो भोग क्या हैं
- भ्रात जिनवाणी सम नहिं आन
म (233)
- मंगल अरिहंत मंगल सिद्धा
- मंगल अवसर आज, आओ जिनमंदिर में
- मंगल अवसर आज, आओ जिनमंदिर में (मंगल अवसर आज, आओ)
- मंगल अवसर आया रे, आया रे
- मंगल आरती आतमराम
- मंगल गाओ, कलश सजाओ
- मंगल घड़ी
- मंगल घड़ी आई
- मंगल तीर्थ क्षेत्र में आये
- मंगल बेला आई रे
- मंगल महोत्सव में साधर्मी आइये
- मंगल ये अवसर आंगण आयो जी
- मंगल विहार, मंगल विहार, श्री जिनवर का मंगल विहार
- मंगल शुभ बेला आयी रे
- मंगल शुभ स्वप्न आए रे
- मंगल-कामना गीत
- मंगलकारी प्रतिष्ठा
- मंगलकारी है, आंनदकारी है, ज्ञायक स्वरूप नित अविकारी है
- मंगलमय अवसर अहो, प्रभुवर मुक्त भये
- मंगलमय आतम अविकारा, धन्य धन्य जिनशासन प्यारा
- मंगलमय जिनराज तुम्हारे
- मंगलमय जिनशासन ध्वज ये
- मंगलमय निजरूप महान, मंगल परमेष्ठी भगवान
- मंगलमय निर्वाण की बेला
- मंगलमय मंगलकरण, अहो ! मंगलमय
- मंगलमय मंगलकार मेरा जिनशासन
- मंगलमय है जिनवाणी, आनंदमय है जिनवाणी
- मंगलमय हो मंगलकारी परमात्मा
- मंगलाचरण
- मंगलाचरण - अरहन्त का शरणा जिसको मिले
- मंगलाचरण , मंगलमय शुद्धातम
- मंगलाष्टक स्तोत्र
- मंत्र जपो नवकार
- मंत्र णमोकार हमें
- मंत्र नवकारा हृदय में धर
- मगन रहु रे! शुद्धातम में
- मग्न रहूँ अपने में ही
- मङ्गल अर्हन्त मङ्गल सिद्धा
- मङ्गल बेला आज आई री सखिरीया
- मङ्गलमय जिनराज तुम्हारे
- मङ्गलायतन की वसुन्धरा पर
- मङ्गलायतन में गर्भ कल्याणक
- मङ्गलायतन में पञ्च कल्याणक जय-जय आदिनाथ
- मणियों के पलने में
- मत कीज्यौ जी यारी, घिनगेह देह जड़ जान के
- मत कीज्यौ जी यारी, ये भोग भुजंग सम जानके
- मत राचो धीधारी, भव रंभथंभसम जानके
- मत सुनो जगत की चेतन, दे प्रभु वचनों पर ध्यान
- मति भोगन राचौ जी
- मधुबन के मंदिरों में
- मन के विकार नासो
- मन भाये चित हुलसाये
- मन मंदिर में तिष्ठो, श्री मुनिराज
- मन महल में दो दो भाव जगे
- मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे
- मन ! मेरे राग भाव निवार
- मन मोहक छवी थारी
- मन वच तन कर शुद्ध
- मन सावधान रहना
- मन हंस ! हमारी लै शिक्षा हितकारी
- मनभावनी जिनमुद्रा
- मनहर तेरी मूरतिया
- मनुष्य जन्म अनमोल रे
- मन्त्र जपो नवकार
- मन्त्र णमोकार हमें प्राणों
- ममता की पतवार ना तोडी
- मरुदेवी माता, जय आदिनाथा
- मस्तक हमारा नत सदा
- महापुण्य फल पाया है
- महाभाग्य जिनशासन पाया
- महाभाग्य से पार्श्व प्रभु दर्श पाया
- महाभाग्य से मैंने जिनदर्श पाया
- महामंत्र णमोकार की रचना जिनवाणी का सार है
- महाराजा स्वामी
- महावीर की मूंगावरणी
- महावीर जीवाजीव छीर-नीर
- महावीर ने क्या किया, मिथ्यातम को दूर किया
- महावीर संदेश ये न्यारा
- महावीर स्वामी हो अन्तरयामी
- महावीर-महावीर-महावीर हो, वर्द्धमान सन्मति अतिवीर हो
- महावीर-महावीर-महावीर हो, वर्द्धमान-सन्मति-अतिवीर हो
- महावीरा झूले पलना
- महिमा अद्भुत जिनराज लखी
- महिमा कही न जाए मुख से
- महिमा जिनमत की
- महिमा जिनमतकी कोई वरन सकै बुधिवान
- महिमा है अगम जिनागम की
- मा विलंब न लाव पठाव तहां री, जहँ जगपति पिय प्यारो
- माँ जिनवाणी ज्ञायक
- माँ जिनवाणी ज्ञायक बताय दियो रे
- माँ जिनवाणी तेरो नाम
- माँ जिनवाणी बसो
- माँ जिनवाणी मुझ अन्तर
- माँ तेरी शरणा में
- माँ ने देखे सोलह सपने
- माँ, प्यारी माँ, जिनवाणी माँ
- माँ… सुनाओ वो गाथा
- मां जिनवाणी ज्ञायक बताय दियो रे
- माता तू दया करके
- माता थारी परिणति तत्त्वमयी
- माता पुत्र तुम्हारा
- माता वामा जायो प्यारा
- मान न कीजिये हो परवीन
- मान ले या सिख मोरी, झुकै मत भोगन ओरी
- मानत क्यों नहिं रे
- मानुष जनम सफल भयो आज
- माया में फ़ंसे इंसान
- माला समझ बूझ कर फेर, जासों मन तेरो फिर जाय
- मितवा रे सुमिरण अवसर आयो
- मितवा रे सुमिरन अवसर आयो
- मिथ्या मोह निवारो चेतन, मिथ्या मोह निवारो
- मिथ्यातम नाशवे को
- मिलता है जिनधरम
- मिलता है सच्चा सुख केवल
- मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे
- मुक्ति का मार्ग तो निर्ग्रन्थ है, स्वाधीन मार्ग तो निर्ग्रन्थ है
- मुक्ति के मार्ग में भव्य उल्लास से, आओ आंनदमय मुक्ति का मार्ग है
- मुक्तिपथ के आदर्श, प्रभु महावीर हैं
- मुझे चरणों से लगा ले
- मुझे है स्वामी उस बल की दरकार
- मुनि दर्शन को चित हुलसाय, धन्य भाग्य प्रत्यक्ष लखाय
- मुनि निजरूप परम शिवभूत
- मुनिराज बनेंगे, अहो ! जिनराज बनेंगे
- मुनिवर आज मेरी कुटिया
- मुनिवर कब दर्शन पाऊँ, गुरुवर कब दर्शन पाऊँ
- मुनिवर का जीवन आनंदमय, है आनंदमय, परमानंदमय
- मुनिवर को आहार
- मुनीश्वर के गुण गाओ रे-2
- मुनीश्वर मग्न रहे निज माँहि
- मूरतिपर वारीरे नेमि जिनिंद
- मूलन बेटा जायो रे साधो
- मृत्यु
- मेघघटासम श्रीजिनवानी
- मेरा ज्ञान उपवन सहज खिल
- मेरा ज्ञायक प्रभु मंगलमय
- मेरा पलने में झूले ललना
- मेरा मन उमगे प्रभु दर्शन को, दर्शन को, स्पर्शन को
- मेरा रोम-रोम रोमांचित
- मेरा सांई तौ मोमैं नाहीं न्यारा
- मेरी अरज कहानी
- मेरी जीभ आठौं जाम, जपि-अपि ऋषभजिनिंदजी का नाम
- मेरी परिणति में आनन्द अपार
- मेरी परिणति में चार-चार भूल
- मेरी परिणति में भगवान, प्रकट हो जावे आतम ज्ञान
- मेरी मैली परिणति नाथ कब निर्मल होगी
- मेरी सुध लीजै रिषभस्वाम! मोहि कीजै शिवपथगाम
- मेरे कब ह्वै वा दिन की
- मेरे कब ह्वै वा दिन की सुघरी
- मेरे गुरु निर्ग्रन्थ वीतराग होई
- मेरे गुरुवर ज्ञायक दर्शाय दियो रे
- मेरे गुरुवर ने ज्ञायक दर्शाय दियो रे
- मेरे चारों शरण सहाई
- मेरे ज्ञायक मेरे भगवन मेरे आतमराम
- मेरे प्रभु का पारस नाम
- मेरे मन भाई तेरी दिव्य छवि
- मेरे मन मंदिर में आन
- मेरे मन मन्दिर में आन
- मेरे मन सूवा, जिनपद पींजरे वसि, यार लाव न बार रे
- मेरे महावीर झूले पलना
- मेरे लागी है लगन, छूटत नाँहि, छूटत नाँहि
- मेरे सर पर रख दो भगवन
- मेरे हृदय विराजो गुरुवर
- मेरे हृदय विराजो नेमीश्वर, मेरे उर में विराजो नेमीश्वर
- मेरो मन खेलत ऐसी होरी
- मेरो मनुवा अति हरषाय
- मैं आतम ध्यन लगाऊँ रे
- मैं आयौ, जिन शरन तिहारी
- मैं उस पथ का अनुगामी हूँ
- मैं उस पथ का अनुगामी हूँ, जिस पर चलकर प्रभु मुक्त हुए
- “मैं” की यात्रा
- मैं क्या माँगूँ भगवान
- मैं चेतन हूँ, जड़ पुद्गल से भिन्न
- मैं जाननहार, ज्ञायक हूँ
- मैं ज्ञान मात्र बस, ज्ञायक हूँ
- मैं ज्ञानानन्द का दरिया
- मैं ज्ञायक हूँ मैं ज्ञायक हूँ
- मैं तेरे ढिंग आया रे
- मैं तो छोड़ चला
- मैं तो जाऊँ शिखरजी वन्दन को’
- मैं तो मूरति निहारूँ जिननाथ की, दीखे मूरत सहज निजनाथ की
- मैं दर्शन ज्ञान स्वरूपी हूँ
- मैं देखा अनोखा ज्ञानी वे
- मैं देखा आतमरामा
- मैं निज आतम कब ध्याऊंगा
- मैं नित्य निरंजन स्वयंसिद्ध प्रभु ध्याऊँ रे
- मैं परम दिगम्बर साधु
- मैं पूजूँ-पूजूँ शिखर सम्मेद महान
- मैं भी अपने ही भरोसे आदिनाथ, अनादिनाथ ध्याऊँगा
- मैं महा पुण्य उदय से
- मैं महाभाग्य से पायी, जिनवाणी मंगलकारी
- मैं रागी बनूँगा न
- मैं वीतराग सर्वज्ञ प्रभु गुण गाऊँ रे
- मैं वीर जन्म के उत्सव पर
- मैं सत् चित् आनंद
- मैं समयसार बन जाऊँ ज्ञायक
- मैं हरख्यौ निरख्यौ मुख तेरो
- मैं हूँ आतमराम
- मैं हूँ उस नगरी का भूप
- मैं हूँ ज्ञायक, सर्वस्व मेरो ज्ञायक
- मैं हूँ पूर्ण ज्ञायक
- मैं हूँ शुद्धातम, सहज परमातम
- मैंने गुरुवर को है ध्याया
- मैंने प्रभुजी के चरण पखारे
- मैंने प्रभुवर रूप निहारा, आनंद उपज्यो अपरम्पारा
- मैंने मुनिराज देखे सपने में
- मोक्ष के प्रेमी हमने
- मोक्ष के प्रेमी हमने
- मोक्ष पद मिलता है धीरे धीरे
- मोह की दीवार
- मोह की महिमा देखो
- मोह की हार (हठ तजो रे बेटा)
- मोह दुःखमय दुख का कारण कहा
- मोहि कब ऐसा दिन आय है
- मोहि तारो जी क्यों ना, तुम तारक त्रिजग त्रिकाल में
- मोहिड़ा रे जिय! हितकारी न सीख सम्हारै
- मोही जीव भरमतमतैं नहिं, वस्तुस्वरूप लखै है जैसैं
- मोहे भावे न भैया
- मोहे लागी लगन गुरु
- म्हांकै घट जिनधुनि अब प्रगटी
- म्हारा आदीश्वर जी
- म्हारा पंच प्रभु भगवान
- म्हारा परम दिगम्बर मुनिवर
- म्हारी जिनवाणी मां
- म्हारी माँ जिनवाणी
- म्हारी माँ जिनवाणी
- म्हारी माँ जिनवाणी
- म्हारे अंगना पधारे प्रभु आज
- म्हारे आँगणें में आये मुनिराज
- म्हारे आंगण आज आई
- म्हारे आंगन आज आई देखो
- म्हारो मन लागो जिन भक्ति में
- म्हारो साँचो साथी
- म्हें तो थाकी आज महिमा जानी, अब लों नहिं उर आनी