भावना की चूनर ओढ़ के, जिनमंदिर में आवजो रे-3
आवजो-3 ऽऽऽ, सारी नगरी को लावजो रे ॥ टेक ॥
श्रद्धा के रंग से रंग दे चुनरिया, ज्ञानगुणों से जड़ी।
मंगल महोत्सव वीर प्रभु का, होगी प्रभावना बड़ी ॥
हो ऽऽऽ लेकर श्रद्धा अपार, आप आवजो रे
सारी नगरी को लावजो रे ॥1 ॥
घन नन घन नन घंटा बाजे, शंख-नगाड़े बजे ।
वीर प्रभु के अभिनंदन से, स्वर्ग-सी धरती सजे ॥
हो ऽऽऽ लेकर श्रद्धा अपार, आप आवजो रे
सारी नगरी को लावजो रे ॥2॥
वीतरागता उर में धारी, वेष दिगम्बर लिया।
सबको मुक्तिमार्ग बताया, जग का कल्याण किया ॥
हो तज के मन के विकार, आप आवजो रे
सारी नगरी को लावजो रे ॥3 ॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २३४
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ऑडियो स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।