Content
Kavita कविता श्रेणी जैन धर्म के सिद्धांतों, तत्त्वचिंतन एवं आध्यात्मिक अनुभूतियों पर आधारित मौलिक काव्य-रचनाओं के लिए समर्पित है। Path जैन पाठ: छहढाला, मेरी भावना, दर्शन पाठ, बारह भावना, समता षोडशी और नित्य स्वाध्याय के अन्य पाठ, मूल पाठ व अर्थ सहित। Jain path texts with original text and meaning. Shastra जैन शास्त्र और ग्रंथ: समयसार, तत्त्वार्थ सूत्र आदि का परिचय, PDF और वेब पाठ। Jain shastras with intro, PDF link and web view. Following is the format: Vidhan विधान: जैन विधान (पूजन) के पूर्ण पाठ, मूल पाठ सहित। Complete Jain vidhan (pujan) texts. Blogs जैन धर्म पर सरल और रोचक लेख, कहानियाँ और छोटे पाठ। Simple, engaging reads on Jain dharma, from all four Anuyog. Children This category will contain material related to small kids like poems, videos, stories which can be used in Pathshala. Anyone is free to contribute to this category after approval from admin. Please contact @Divya or @jainsulabh to contribute to this. Online Swadhyay Terminology Puja अरहन्त आदि का उद्देश्य करके गंध, पुष्प, धूप, अक्षतादि अर्पित करना द्रव्यपूजा है तथा उनके आदर में खड़े होना, प्रदक्षिणा करना, प्रणाम करना आदि शारीरिक क्रिया और वचन से गुणों का स्तवन भी द्रव्यपूजा है तथा मन से उनके गुणों का स्मरण भावपूजा है। Bhakti चेतन, जड़ नहीं होता और जड़, चेतन नहीं होता। जड़ के स्वभाव में चेतनपना नहीं होता और चेतन के स्वभाव में जड़पना नहीं होता। जड़ के संयोग से होनेवाला विकार भी वस्तुतः चेतन का स्वभाव नहीं है। जैसे, सर्वज्ञदेव वीतराग बिम्ब है, वैसा ही आत्मा का स्वभाव है - ऐसे लक्ष्यसहित वीतराग भगवान् की भक्ति इत्यादि का राग आवे, वह प्रात:काल की सन्ध्या / लालिमा जैसा है। जिस प्रकार प्रात:काल की सन्ध्या / लालिमा के पश्चात् सूर्योदय होता है और सायंकाल की सन्ध्या / लालिमा के पश्चात् सूर्यास्त हो जाता है; उसी प्रकार वीतरागता के लक्ष्यपूर्वक भगवान् की भक्ति इत्यादि का जो शुभराग है, वह प्रात:कालीन लालिमा के समान है; तत्पश्चात् जगमगाता चैतन्य सूर्य उदय होनेवाला है।