धन्य धन्य आज घड़ी कैसी सुखकार है ।
जिन-चरणों की भक्ति करके आनन्द अपार है ॥टेक॥
खुशियाँ अपार आज हर दिल में छाई हैं ।
दर्शन के हेतु देखो जनता अकुलाई हैं ॥
चारों ओर देख लो भीड़ बेशुमार है ॥१ ॥
भक्ति से नृत्य गान कोई हैं कर रहे ।
आतम सुबोध कर पापों से डर रहे ॥
पल-पल पुण्य का भरे भण्डार है ॥२ ॥
जय-जय के नाद से गूंजा आकाश है ।
छूटेंगे पाप सब निश्चय ये आज है ॥
देख लो सौभाग्य खुला आज मुक्ति द्वार है ॥३ ॥
महावीर के सन्देशों को जीवन में अपनाएँगे ।
भेदज्ञान की ज्योति जलाकर महावीर बन जाएँगे ॥
सत्य अहिंसा अनेकान्त ही जिनवाणी का सार है ॥४ ॥