जय जय सिद्ध भगवान आदर्श मेरे
शाश्वत सुख की खान आदर्श मेरे
जय जय सिद्ध भगवान आदर्श मेरे
अविनाशी अन्तरहित स्वाधीन सिद्ध प्रवर
कैवल्य ज्ञानधारी लहराता सुखसागर
हो पूर्ण ज्ञानमय तुम निजतृप्त स्वभावी हो
निज रूप दिखाने को दर्पण सम भावी हो
जय जय सिद्ध भगवान आदर्श मेरे
कृतकृत्य आप प्रभुवर चिन्मय चिद्रुपी हो
हो शुद्ध बुद्ध अविरुद्ध आनंदस्वरूपी हो
मैं जग में सुख खोजा सुख का न लेश पाया
लख तुमको पूर्ण सुखी मैं शरण तेरी आया
जय जय सिद्ध भगवान आदर्श मेरे
तुम गुणचिंतत से ही निज पद का भान हुआ
है सिद्ध स्वपद मेरा निश्चय श्रद्धान हुआ
मैं सिद्धस्वरूपी हूँ तुमको लख ये जाना
निरभार हुआ स्वामी निज को जब पहचाना
जय जय सिद्ध भगवान आदर्श मेरे
Artist: डॉ. विवेक जी, छिंदवाड़ा