सहज जानना देखना ही सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ है

सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ है सहज जानना देखना ।
कर्तापन का भाव न रखना यही वीर जिन देशना ।।

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जय जिनेन्द्र, उपयोग निज स्वभाव में लगाना चाहिए|