मङ्गल अर्हन्त मङ्गल सिद्धा | ma ngala arhanta ma ngala siddha

मङ्गल अर्हन्त मङ्गल सिद्धा,

मङ्गल साधु पद पा जाना;
मङ्गलमय जिनवाणी माता,
कैवल्य कला को पा जाना ॥
मङ्गल अर्हन्त… ॥ टेक ॥
ये चारों मङ्गल उत्तम है,
मैं शरण इन्हीं की पा जाऊँ।
इनका ही मनन सुमिरन करके,
अपने शुद्धातम को ध्याऊँ।
अन्वेषण हो आराधन हो,
फिर नित्य निरंजन पा जाना।
मङ्गल अर्हन्त… ॥1 ॥

ये पञ्चकल्याणक सुयोग मिला,
निर्वाण भूमि पर आ जाना।
मङ्गल सुयोग महान् मिले,
जिनवाणी का अमृत पाना।
मेरा महंगा नरभव सफल बने,
ऐसा कुछ गुरूवर बतलाना।
मङ्गल अर्हन्त… ॥2॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ७