पूजें अकृत्रिम जिनमंदिर, पूजें अकृत्रिम जिनबिम्ब।
जानें अकृत्रिम निजभाव, ध्यावें अकृत्रिम चिद्बिम्ब।। 1।।
आज सु-मंगल अवसर आया, सबके मन में आनन्द छाया।
भक्तिभाव से पाठ रचावें, दुखमय सर्व विभाव नशावें।। 2।।
यद्यपि शक्ति गमन की नाहिं, तो भी मन में अति उत्साह ।
करें जिनागम से निरधार, ज्ञान माँहि सम्यक् सु-विचार ।। 3 ।।
जाना सर्व जगत् निस्सार, जिनवर साँचे तारणहार ।
मंगल-उत्तम-शरण चितार, करते प्रभु की जय-जयकार ।। 4 ।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’