प्रभुवर ऐसी दीवाली मनाऊँ | prabhuvara aisi divali manau n

प्रभुवर ऐसी दीवाली मनाऊँ ।। टेक ।।

तत्त्वज्ञान कर भेदज्ञान कर, स्वानुभूति प्रगटाऊँ ।
सम्यक् ज्ञान प्रकाश जगमगे, मोह अंधेरा भगाऊँ।। 1।।

दैन्य भाव तज स्वाभिमान धरि, इन्द्रिय विजय कराऊँ।
ब्रह्म स्वरूप सु अपनो ध्याऊँ, अब्रह्म सकल नशाऊँ।। 2 ।।

आत्मीक ध्रुव विभव संभालूँ, दारिद्र सहज मिटाऊँ।
हो निर्ग्रन्थ स्वरूप मग्न हो, केवल लक्ष्मी पाऊँ।। 3।।

वीतराग रह सहज भाव से, धर्म तीर्थ वर्ताऊँ ।
कर्म उपाधि दूर भगाकर, सिद्ध स्वपद प्रगटाऊँ।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३२५ से ३२६
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’