भाई ! ज्ञान का राह सुहेला रे | Bhai ! Gyaan ka raah suhela re

भाई ! ज्ञान का राह सुहेला रे |
दरव न चहिये, देह न दहिये, जोग भोग न नवेला रे || टेक ||

लड़ना नाहीं, मरना नाहीं, करना बेला तेल रे |
पढ़ना नाहीं, गढ़ना नाहीं, नाचन गावन मेला रे || १ ||

न्हानां नाहीं, खाना नाहीं, नाहिं कमाना धेला रे |
चलना नाहीं, जलना नाहीं, गलना नाहीं देला रे || २ ||

जो चित्त चाहै, सो नित दाहै, चाह दूर करि खेला रे |
‘घानत’ यामें कौन कठिनता, बे - परवाह अकेला रे || ३ ||

Artist- पं. घानतराय जी