फँसेगा जो दुनिया में वह ख्वार होगा
फँसेगा जो दुनिया में वह ख्वार होगा।
रहेगा जुदा जो समझदार होगा ॥टेक ॥
समझ देख दुनिया यह है धर्मशाला।
यहाँ ठहरना सिर्फ दिन चार होगा ॥१॥
नहीं साथ जायेगी दुनिया की दौलत ।
यहीँ छोड़ जाना यह घरबार होगा ॥२॥
तू जिसके लिये रात दिन पाप करता।
नहीं साथ तेरे ये परिवार होगा ॥३॥
है चलना जरूरी तू सामान कर ले।
सफर परलोक का फिर दुश्वार होगा ॥४॥
धर्म ही तेरे काम आवेगा शिवराम ।
नहीं और कोई मददगार होगा ॥५॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ५७ (विभिन्न कवियों के भजन)