मंगल अवसर आया रे, आया रे | mamgala avasara aya re aya re

तर्ज : कैसो सुंदर अवसर आयो रे …

मंगल अवसर आया रे, आया रे।

वीतराग सर्वज्ञ प्रभु का दर्शन पाया रे।। टेक ।।

दर्शन श्री जिनराज का, महाभाग्य से पाय।
ताके भव-भव के करम, क्षण में सहज नशाय ।। 1 ।।

दर्शन जिनवर का अहो ! लोकोत्तम परधान।
अन्तरंग में स्वयं ही, जगे भेद-विज्ञान।। 2।।

जिनवर की भक्ति करें, मन में धरि उल्लास।
मुक्ति लक्ष्मी भी सहज, आवे ताके पास।। 3।।

प्रभुवर की मुद्रा लखे, दिखे समय का सार।
फिर चक्री इन्द्रादि पद, भासें सर्व असार ।। 4।।

दुर्विकल्प सब त्याग कर, जिनगुण गावें आज।
यही भावना हे प्रभो ! पावें सिद्ध समाज ।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ७० से ७१
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’