भक्ति भाव से पूरित हो हम, महावीर गुण गायेंगे | bhakti bhava se purita ho hama mahavira guna gayemge

भक्ति भाव से पूरित हो हम, महावीर गुण गायेंगे।

महावीर सम निज शुद्धातम, सहजपने हम ध्यायेंगे।। टेक ।।

ज्ञायक रूप लख्यो अपनो पद, पर में नहिं भरमायेंगे।
वीतराग पद साध्य हमारा, राग में नहीं अटकायेंगे।। 1।।

ज्ञाता-दृष्टा सहज रहेंगे, कर्त्ता बुद्धि न लायेंगे।
निजानन्द में तृप्त रहेंगे, पर- भोक्तृत्व नशायेंगे।। 2।।

पापोदय चाहे जैसा हो, पाप भाव नहीं लायेंगे।
पुण्योदय में नाहिं फसेंगे, शुभ में नहिं अटकायेंगे।। 3।।

मैत्री भाव धरें सब में ही, बैर क्षोभ नहीं लायेंगे।
संतोषी हो आत्मनिष्ठ हो, तृष्णा दूर भगायेंगे।। 4।।

तत्त्वज्ञान अभ्यास करेंगे, नित वैराग्य बढ़ायेंगे।
विषय - कषायारम्भ छोड़कर, निर्ग्रन्थ पद अपनायेंगे ।। 5 ।।

सदा सहज निरपेक्ष रहेंगे, निर्विकल्प पद भायेंगे।
परम ब्रह्मचर्य पाकर, निज में ही रम जायेंगे।। 6।।

कर्म नशेंगे, गुण विकसेंगे, परमातम पद पायेंगे।
हुई प्रतीति स्वाश्रय से ही, भव सागर तिर जायेंगे।। 7।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १२६
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’