पंखिड़ा तू उड़ के जाना स्वर्ग-पुरी में
पंखिड़ा होss पंखिड़ा
पंखिड़ा तू उड़ के जाना स्वर्ग-पुरी में
कहना इन्द्र से कि चलो मध्य-लोक में
मध्य लोक में श्री जिनवारों के नाथ जन्में हैं
उनके माता पिता और तीनों लोक हर्षे हैं
हाथी लाओ घोड़ा लाओ चलो बैठ के ॥१ कहना..॥
प्रभु के जन्म-कल्याणक ख़ुशी से बढ़के कुछ नहीं
पभु के रूप सौन्दर्य से है बढ़के कुछ नहीं
स्वर्ण लाओ रत्न लाओ बांटों जनम में ॥२ कहना..॥
प्रभु का जन्म-नह्वन मेरु शिखर पर कराना है
क्षीरोदधि से इक सहस्र कलश भर के लाना है
भक्ति करो नृत्य करो प्रभु के जनम में ॥३ कहना..॥
स्रोत: nikkyjain.github.io (कल्याणक भजन)
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