भोंदू भाई, ते हिरदे की आँखें | Bhondu Bhai Te Hirde Ki Aankhen

भोंदू भाई, ते हिरदे की आँखें

भोंदू भाई, ते हिरदे की आँखें ।
जै करषै अपनी सुख सम्पति, भ्रम की सम्पति नाखें ॥टेक॥

जे आँखें अमृतरस बरसैं, परखैं केवल वानी ।
जिन्ह आँखिन विलोक परमारथ, होहिं कृतारथ प्रानी ॥
भोंदू भाई, ते हिरदै की आँखैं ॥१॥

जिन आँखिनहिं दशा केवल की, कर्म लेप नहिं लागै ।
जिन आँखिन के प्रगट होत घट, अलख निरंजन जागै ॥
भोंदू भाई, ते हिरदै की आँखैं ॥२॥

जिन आँखिन सौं निरखि भेद गुन, ज्ञानी ज्ञान विचारै ।
जिन आँखिन सौं लखि स्वरूप मुनि, ध्यान धारणा धारै ॥
भोंदू भाई, ते हिरदे की आँखें ॥३॥

जिन आँखिन के जगे जगत के, लगे काज सब झूठे ।
जिन सौं गमन होंइ शिव सनमुख, विषय-विकार अपूठे ॥
भोंदू भाई, ते हिरदे की आँखें ॥४॥

इन आँखिन में प्रभा परम को, पर सहाय नहीं लेखें ।
जे समाधि सौं लखे अखण्डित, ढकै न पलक निमेखैं ॥
भोंदू भाई, ते हिरदै की आँखैं ॥५॥

जिन आँखिन की ज्योति प्रगटकैं, इन आँखिन में भासै ।
तब इनहू की मिटे विषमता, समता रस परगासै ॥
भोंदू भाई, ते हिरदे को आँखैं ॥६॥

जे आँखैं पूरनस्वरूप धरि, लोकालोक लखावैं ।
ए वे यह वह सब विकल्प तजि, निरविकल्प पद पायें ॥
भोंदू भाई, ते हिरदे को आँखें ॥७॥


Artist: पं. बनारसीदास जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं बनारसीदास कृत भजन)

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