मैं भी अपने ही भरोसे आदिनाथ, अनादिनाथ ध्याऊँगा | maim bhi apane hi bharose adinatha anadinatha dhyau nga

तर्जः मैंने तेरे ही भरोसे भगवान…

मैं भी अपने ही भरोसे आदिनाथ, अनादिनाथ ध्याऊँगा।

तेरी जैसी ही निज प्रभुता हे नाथ, मैं भी निज में पाऊँगा ।। टेक ।।

तुम सम लख निज आत्मा, सम्यग्दर्शन पाय ।
ज्ञान से ज्ञान को ध्याय कर, भेद विकल्प मिटाय।। 1।।

प्रकटै निज अनुभव करै, चेतन सत्ता रूप।
सब ज्ञाता लखि के नमौं, समयसार शिवभूप।। 2।।

समयसार अविकार का, वर्णन कर्ण सुनन्त ।
द्रव्य-भाव-नोकर्म तजि, आतम तत्त्व लखन्त।। 3।।

प्रभु तुम उपकारी महा, आतम दियो दिखाय ।
निज आतम में लीन हो, पहुँचूँ शिवपुर जाय।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ६१
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’