मैं तो छोड़ चला गतियों का वेश
सिद्धों का प्यारा लगे
मोह आता है आनंद विशेष
सिद्धों का घर प्यारा लगे ॥ टेक ॥
हमें यहाँ अच्छा नहीं लगता,
यहाँ हमारा कोई न दिखता।
मोहे लागे यहाँ परदेश,
सिद्धों का घर प्यारा लगे॥1 ॥
पाप भाव में जीवन बिताया,
पुण्य भाव में खुद को लुभाया।
मैं तो धारूँ दिगम्बर वेश,
सिद्धों का घर प्यारा लगे ॥2॥
अब तो यही भावना भाऊँ,
तत्त्वज्ञान में जीवन लगाऊँ।
निग्रंथों का पथ अपनाकर,
निज में निज का ध्यान लगाऊँ ॥
करूँ सिद्धों की नगरी प्रवेश,
सिद्धों का घर प्यारा लगे ॥3॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन