मेटो विथा हमारी प्रभूजी मेटो विथा हमारी
(राग प्रभाती)
मेटो विथा हमारी प्रभूजी मेटो विथा हमारी ॥टेर ॥
मोह विषमज्वर आन सतायौ देत महा दुःखभारी ।
यो तो रोग मिटन को नाहीं, औषध बिना तिहारी ॥१॥
तुम ही बैद धन्वन्तर कहिये, तुमही मूल पसारी।
घट घट की प्रभु आपही जानो क्या जाने वैद्य अनारी ॥२॥
तुम हकीम त्रिभुवनपति नायक, पाऊँ टहल तुम्हारी।
संकट हरण चरण जिनजी का नैनसुख शर्ण तिहारी ॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ३७ (विभिन्न कवियों के भजन)