मैं पूजूँ-पूजूँ शिखर सम्मेद महान।। टेक ।।
तीर्थंकर मुनिराज बीस ने लह्यो मुक्ति पद आन।। 1 ।।
और मुनीश्वर बिन गिनती के, भये सिद्ध भगवान।। 2 ।।
जनम-जनम के पातक विनशें, मिले सुख निर्वान ।। 3 ।।
यह वरदान प्रभुजी चाहूँ, कीजो आप समान।। 4।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’