मानी मनुआ, मद की बातें क्यों सुहाती है
मानी मनुआ, मद की बातें क्यों सुहाती है,
मद तो सुख का घाती है ।
तज दे अभिमान गैली, नरकों ले जाती है ॥
मद तो सुख का घाती है ॥टेक॥
भूल है तेरी भूल बड़ी, भूल में आयु फूल झड़ी ।
अब भी तज दे मान कहा, निजरूप परख ले शुभ दिन है ।
जब ज्ञान सखा है हितकारी ।
तज दे अभिमान गैली, नरकों ले जाती है ॥
मद तो सुख का घाती है ॥1॥
बैठ प्रभु की शरण जरा, है ये नश्वर भोग धरा ।
वीतराग पथ धार खरा, ‘सौभाग्य’ मिलेगी शिवरमणी ।
जो अक्षय अमर अखंडित है ।
तज दे अभिमान गैली, नरकों ले जाती है ॥
मद तो सुख का घाती है ॥2॥
Artist: श्री सौभाग्यमल जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं सौभाग्यमल कृत भजन)
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