पारस प्रभु साँचे उपकारी, पारस प्रभुवर नित अविकारी | Paras Prabhu Sace Upakari Paras Prabhuvar Nit Avikari

पारस प्रभु साँचे उपकारी, पारस प्रभुवर नित अविकारी।

पारस प्रभुवर सब दुःखहारी, पारस प्रभु जग मंगलकारी।। टेक ।।

कर्मरूप पर्वत के भेत्ता, पारस प्रभु शिवमग के नेता।
पारस प्रभु सब जग के ज्ञाता, पारस प्रभु अक्षय पद दाता ।।1।।

प्रभो परम निर्दोष निरामय, गुण अनन्तमय परमानन्दमय।
सहज ब्रह्मचर्य है निष्काम, भक्ति भाव से करूँ प्रणाम।।2।।

ध्रुव अविचल पंचम गति पाई, अनुपम दशा प्रभो प्रगटाई ।
इन्द्रादिक प्रभु भक्ति रचावें, गणधरादि भी तुम गुण गावें ।।3।।

रहो सदा आदर्श जिनेश्वर, आराधू निजपद परमेश्वर।
नहीं भय कोई नहीं कुछ आशा, सहज पूर्ण चेतन पद भासा ।।4।।

निर्ग्रन्थ दशा सहज प्रगटावे, भाव विशुद्धि बढ़ती जावे।
दुखमय आवागमन मिटाऊँ, अहो ! परमपद प्रभु सम पाऊँ ।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’