मंगल अवसर आज, आओ जिनमंदिर में | mamgala avasara aja ao jinamamdira mem

तर्जः जिनवाणी अमृत रसाल…

मंगल अवसर आज, आओ जिनमंदिर में।

अपने हित के काज, आओ जिनमंदिर में ।। टेक ।।

अद्भुत वीतराग छवि प्रभु की, कैसी सुन्दर सोह रही।
शान्ति सुधा बरसाती जग में, भव्यों का मन मोह रही ।।
प्रत्यक्ष निहारो आज ।। आओ. ।। 1 ।।

इन्द्रादिक भी भक्ति करके, भाव विशुद्धि बढ़ाते हैं।
जिनवर के गुण चिन्तन कर, वैराग्य भावना भाते हैं ।।
मिलकर सकल समाज ।। आओ. ।। 2 ।।

परम हर्ष से दर्शन करके, भक्ति कर मंगलकारी।
जिनवाणी का श्रवण करो, फिर सामायिक आनन्दकारी ।।
देखो निज साम्राज्य ।। आओ. ।। 3 ।।

मिथ्या जगत् प्रपंच छोड़कर, सम्यक् तत्त्व स्वरूप विचार।
प्रभु सम ही पुरुषार्थ जगाओ, निज निर्ग्रन्थ स्वरूप निहार ।।
पाओ सिद्ध समाज ।। आओ. ।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १९ से २०
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’