मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे | Man Murakh Panthi Us Marag Mati Jay Re

मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे

मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे ।।टेक।।

कामिनि तन कांतार जहां है, कुच परवत दुखदाय रे ।।
काम किरात बसै तिह थानक, सरवस लेत छिनाय रे ।
खाय खता कीचक से बैठे, अरु रावनसे राय रे ।।१।।मन ।।

और अनेक लुटे इस पैंडे, वरनैं कौन बढ़ाय रे ।
वरजत हों वरज्यौ रह भाई, जानि दगा मति खाय रे ।।२।।मन ।।

सुगुरु दयाल दया करि ‘भूधर’, सीख कहत समझाय रे ।
आगै जो भावै करि सोई, दीनी बात जताय रे ।।३।।मन ।।


Artist: पं. श्री भूधरदास जी
स्रोत: भूधर भजन सौरभ, पृष्ठ ९२