भगवान् आत्मा, भगवान् आत्मा
भगवान् आत्मा, भगवान् आत्मा ।
शाश्वत परमात्मा, शाश्वत परमात्मा ।।टेक।।
भगवान् आत्मा सुख का निधाना ।
सहज ही ज्ञायक, सहज ज्ञेय जाना ।।1।।
भगवान् आत्मा, महातत्त्व अनुपम ।
दीखे दूजा कहीं आत्मा सम ।।2।।
पूर्ण स्वयं में सदा ही विभू हूँ ।
स्वाधीन अखण्ड प्रतापी प्रभू हूँ ।।3।।
आराध्यों का भी आराध्य आत्मा ।
सहज पूज्य निर्मल, सहज मुक्त आत्मा ।।4।।
जिन जिनने अपना, शुद्धात्मा ध्याया ।
महानंदमय मोक्ष निज में ही पाया ।।5।।
ध्याऊँ शुद्धात्मा न कुछ और भाया ।
परम शान्तिमय यह सहज मंत्र पाया ।।6।।
स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ १२७