भवदधि-तारक नवका जगमाहीं जिनवान | Bhavdadhi tarak navka jagmaahin Jinwan

shastra
budhjanji

#1

भवदधि-तारक नवका जगमाहीं जिनवान |
नय प्रमान पतवारी जाके, खेवट आतम ध्यान || टेक ||

मन वच तन सुध जे भवि धारत, ते पहुंचत शिवथान |
परत अथाह मिथ्यात भँवर ते, जे नहिं गहत अजान || १ ||

बिन अक्षर जिनमुख तैं निकसी, परी वरनजुत कान |
हितदायक ‘बुधजन’ कों गनधर, गूंथे ग्रन्थ महान || २ ||

Artist : कविवर पं. बुधजन जी