मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन-²
जय वीतराग विज्ञान , मेरा जिनशासन-²
मंगलमय मंगलकरण , वीतराग विज्ञान ।
नमौं ताहि जातैं भये , अरहंतादि महान् ।।
करि मंगल करिहौं महा , ग्रंथ करन को काज ।
जातैं मिले समाज सब , पावै निजपद राज ।।
है शाश्वत सुख की खान , मेरा जिनशासन ।
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।
मिथ्याभाव अभावतैं , जो प्रगटे निजभाव ।
सो जयवंत रहौ सदा , यह ही मोक्ष उपाव ।।-²
हे मुक्तिपुरी सोपान , मेरा जिनशासन ।
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।
सो निजभाव सदा सुखद , अपनौं करौ प्रकाश ।
जो बहुविधि भवदु:खनि कौ , करिहै सत्ता नाश।।-²
दिखा ज्ञायक देव महान् , मेरा जिनशासन-²
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।-²
इस भव के सब दु:खनि के , कारण मिथ्याभाव ।
तिनिकी सत्ता नाश करि , प्रगटै मोक्ष उपाव ।।-²
देता मुक्ति का वरदान , मेरा जिनशासन।-²
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।-²
बहुविधि मिथ्या गहनकरि , मलिन भयो निजभाव ।
ताको होत अभाव हैं , सहजरूप दरसाव ।।-²
मिला सम्यक् तत्त्व महान् , मेरा जिनशासन ।-²
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।-²
मिथ्या देवादिक भजें , हो हैं मिथ्याभाव ।
तज तिनकों सांचे भजो , यह हिय हेत उपाव ।।-²
सत् दर्शन ज्ञान प्रधान , मेरा जिनशासन ।-²
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।-²
इस भवतरु का मूल इक , जानहुँ मिथ्याभाव ।
ताकौं करि निर्मूल अब , करिए मोख उपाव ।।-²
शिवसुख ही है पहचान , मेरा जिनशासन ।-²
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।-²
शिव उपाय करते प्रथम , कारन मंगल रूप ।
विघ्न विनाशक सुख करन , नमो शुद्ध शिवभूप।।-²
सत्पथ शाश्वत सोपान , मेरा जिनशासन-²
मंगलमय मंगलकार , मेरा जिनशासन ।।-²
जय वीतराग विज्ञान , मेरा जिनशासन ।।
रचनाकार: डॉ. विवेक जैन छिंदवाड़ा
स्वर : श्रुति चौधरी