मिथ्या यह संसार है, झूठा यह संसार है रे
मिथ्या यह संसार है, झूठा यह संसार है रे
जो देही षट्रससों पोषै, सो नहिं संग चलै रे।
औरनिको तोहि कौन भरोसो, नाहक मोह करै रे, भाई॥मिथ्या.॥१॥
सुखकी बातें बूझै नाहीं, दुखको सुक्ख लखै रे।
मूढ़ोंमाहीं मातों डोलै, साधौं पास डरै रे, भाई ॥मिथ्या. ॥२॥
झूठ कमाता झूठी खाता, झूठी जाप जपै रे ।
सच्चा सांई सूझै नांहीं, क्यों करि पार लगैरे, भाई॥मिथ्या. ॥३॥
जमसों डरता फूला फिरता, करता मैं मैं मैं रे।
‘द्यानत’ स्याना सोही जाना, जो प्रभु ध्यान धरै रे भाई॥मिथ्या.॥४॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ११०