पीजे-पीजे रे चेतनवा, पानी छान-छान के
पीजे-पीजे रे चेतनवा, पानी छान-छान के ॥टेक॥
निरख-निरख कर पग धर चलना,
जैन वयन सत् मान-मान के ॥१॥
हित-मित वचन कहो मेरे प्यारे,
क्रोध लोभ मद भान-भान के ॥२॥
निशि-भोजन को भूल नहीं करना,
जीव पड़ गया इनमें आन-आन के ॥३॥
‘न्यामत’ हलन-चलन जो करना,
करना सुमति हिय ठान-ठान के ॥४॥
Artist: पं. न्यामतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (अध्यात्म भजन)
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