बाहुबलि स्वामी ! दर्शन की बलिहारियाँ | bahubali svami darshana ki balihariya n

तर्जः जिनवाणी माता दर्शन की बलिहारियाँ …

बाहुबलि स्वामी ! दर्शन की बलिहारियाँ ।। टेक।।

अहो ! परम ज्ञायक प्रभु जाना, पर भावों से न्यारा।
सहज चतुष्टयवंत अनुपम, स्वयं सिद्ध अविकारा ।। 1।।

जिसका एक स्फुरण ही तो, मोह कलंक नशावे।
स्वानुभूति के उदय होत ही, सहजानंद विलसावे ।। 2।।

निज परमात्म भावना से ही, सर्व विकार नशावें।
सहज होय निर्ग्रन्थ अवस्था, आत्म ध्यान प्रगटावे ।। 3।।

आत्म ध्यान की शोधक अग्नि, सकल कर्ममल जारे ।
स्वाभाविक प्रभुता मंडित हो, ध्रुव शिवलोक पधारे।। 4।।

आत्म बोध के निमित्तभूत, प्रभुभाव नमन सुखकारा।
जयवंतो जिनवर का शासन, समयसारमय प्यारा।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १३७ से १३८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’