मंगल विहार, मंगल विहार, श्री जिनवर का मंगल विहार ।
आनंद अपार, आनंद अपार, सबके हृदय में आनंद अपार ॥ टेक ॥
जिनवर का दर्शन सब ही करेंगे, जन्म-जन्म के पाप हरेंगे।
घर-घर में मंगलाचार ॥ 1 ॥.
जिनवर की भक्ति सब ही करेंगे, भाव विशुद्ध सहज ही रहेंगे।
समझें समय का सार ॥ 2 ॥
जिनवर की वाणी सब ही सुनेंगे, तत्त्वों का सम्यक् निर्णय करेंगे।
रत्नत्रय का हो प्रसार ॥ ३॥
जिनवर का संदेश सब जग में व्यापे, सम्यग्ज्ञान कला परकाशे ।
नाशेंगे पापाचार ॥ 4 ॥
सभी आत्मा सिद्ध समान, द्रव्यदृष्टि से हैं भगवान ।
गूंजेगी जय-जयकार ॥ 5॥
जिनराज मुनिराज जयवंत वर्तो, जिनवाणी जिनधर्म जयवंत वर्तो।
वंदन अगणितबार ॥ 6 ॥
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २६९ से २७०
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’