माँ, प्यारी माँ, जिनवाणी माँ | ma.n, pyari ma.n, jinavani ma.n

माँ, प्यारी माँ, जिनवाणी माँ…

सात तत्त्वों छह द्रव्यों का जो ज्ञान कराती।
स्व और पर में भेदविज्ञान जो हमें कराती ॥
ज्ञान तुझसे किया ग्रहणऽऽ
बारंबार तुम्हें शत नमन… हो माँ, प्यारी माँ…
संसार से छूटने का मारग हमें बताती ।
स्याद्वाद मयी अमृत का जो पान कराती ॥
देत ढोक आपके चरणऽऽ
बारंबार तुम्हें शत नमन… हो माँ, प्यारी माँ…
मोक्षालय का सच्चा मारग हमें बताती ।
वीतरागता का संदेश जन तक पहुँचाती ॥
‘स्नेह’ से तुझे शत् नमन्ऽऽ
बारंबार तुम्हें शत नमन… हो माँ, प्यारी माँ…


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन