बाल ब्रह्मचारी प्रभो ! नेमीश्वर महाराज | bala brahmachari prabho nemishvara maharaja

बाल ब्रह्मचारी प्रभो ! नेमीश्वर महाराज ।

ब्रह्मचर्य परिपूर्ण हो, भाव यही जिनराज ।। टेक ।।

परमानन्दमय ब्रह्मचर्य, शिव सुख का आधार।
ब्रह्मचर्य बिन व्यर्थ ही, रूलता फिरे गँवार ।। 1 ।।

मोही विषयासक्त का, हो न कभी उद्धार।
निर्मोही स्वातम-रसी, शीघ्र होय भव पार ।। 2 ।।

पर लक्ष्यी वृत्ति अरे, सबहि महादुःखकार।
ध्रुव ज्ञायक के लक्ष्य से, प्रगटे शिव अविकार ।। 3 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १०३
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’