मंगलकारी है, आंनदकारी है, ज्ञायक स्वरूप नित अविकारी है | Mamgalakari Hai Amnadakari Hai Jnayak Svarup Nit Avikari Hai

मंगलकारी है, आंनदकारी है, ज्ञायक स्वरूप नित अविकारी है।

ज्ञायक न जन्मे, ज्ञायक न मरता,
भूल से अज्ञानी, भव-भव में भ्रमता।
शुद्ध निजातम को जब ही समझता,
आवागमन का फेरा ही मिटता।।
सब दुःखहारी है, शिव सुखकारी है।। ज्ञायक. ।।। ।।
काया में रहते भी, काया से न्यारा,
जिसमें न कर्मों का, किंचित् पसारा।
सदा सहज जो जाननहारा,
निरपेक्ष देखन जाननहारा।।
महिमा न्यारी है, प्रभुता भारी है।। ज्ञायक. ।।2।।

जिसका ध्यान धरें मुनि उत्तम,
है परमार्थ ध्येय लोकोत्तम ।
आराधन करके चरमोत्तम,
शिवपद पाते है परमोत्तम ।।
निज निधि धारी है, भवि हितकारी है।।ज्ञायक. ।।३।।

जिसका आश्रय भव दुःख भंजन,
आराधन है मुनि मन रंजन।
भाओ ध्याओ अहो भविकजन,
नित्य निरामय, नित्य निरंजन ।।
क्रांतिकारी है, परम अविकारी है। । ज्ञायक. ।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’