पंच-परमेष्ठी प्रभु सार, इस असार संसार में | pamcha parameshthi prabhu sara isa asara samsara mem

पंच-परमेष्ठी प्रभु सार, इस असार संसार में ।। टेक ।।

अरहंत प्रभु जी सर्व के ज्ञाता, राग-द्वेष जीतनहार ।। 1 ।।

सिद्ध परमात्मा मोक्ष में राजे, अक्षय सुख अविकार ।। 2 ।।

आचार्य चतुर्विध संघ के नायक, पालें पलवावें आचार ।। 3 ।।

उपाध्याय गुरु पढ़ें-पढ़ावें, ज्ञान बगीचे रमनार।। 4।।

साधु अट्ठाईस गुणों से शोभें, रत्नत्रय भंडार।। 5।।

संसार के सुख दुःखरूप हैं, सुख अतीन्द्रिय सार ।। 6 ।।

आत्मन् ! सो सुख धर्म से मिलता, धर्म शरण सुखकार ।। 7 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’