म्हारे आंगण आज आई | Mhare Aangan Aaj Aai

म्हारे आंगण आज आई देखो मंगल घड़ी
मंगल घड़ी आई पावन घड़ी…
म्हारे आंगण आज आई देखो मंगल घड़ी…

  1. मरूदेवी माता जी ललना जायो, तीर्थंकर सुत नाभि घर आयो।
    दुल्हन सी आज लागे देखो अयोध्यापुरी…
    म्हारे आंगण आज आईं…मंगल घड़ी रे आई पावन घड़ी

  2. अंतिम जन्म लिया प्रभु तुमने, स्वानुभूति रमणी को वरने।
    फिर नरकों में भी पलभर देखो शांति पड़ी..
    म्हारे आंगण आज आई…मंगल घड़ी रे आई पावन घड़ी

  3. सुरपति ऐरावत ले आये, शची इन्द्राणी मंगल गीत गाये।
    कलशा सजा ले आये क्षीर नीर भरी ….
    म्हारे आंगण आज आई…मंगल घड़ी रे आई पावन घड़ी

  4. रत्नमयी पलना में झूले, निज वैभव के रतन न भूले
    तीर्थेश्वर नाथ महिमा तुमरी जग में बड़ी…
    म्हारे आंगण आज आई…मंगल घड़ी रे आई पावन घड़ी

  5. ज्ञानमात्र का अनुभव करते, परज्ञेयों में जो नहीं रमते।
    दृष्टि सदा निज में थिर रहती ज्ञानमयी…
    म्हारे आंगण आज आई…मंगल घड़ी रे आई पावन घड़ी

रचनाकार : डॉ० विवेक जैन, छिंदवाडा

खोज: Mhare Angan Aj Ai

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महावीर जयंती

त्रिशला माता जी ललना जायो, तीर्थंकर सुत सिद्धार्थ घर आयो।

दुल्हन सी आज लागे देखो कुंडलपुरी… म्हारे आंगण आज आईं… मंगल घड़ी रे आई पावन घड़ी

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