बोलो-बोलो-बोलो भाई, वीर प्रभु जय बोलो।
तौलो-तौलो-तौलो भाई, तत्त्वारथ को तौलो।। 1।।
परखो-परखो-परखो भाई, रत्नत्रय को परखो।
निरखो-निरखो-निरखो भाई, निज स्वभाव को निरखो।। 2 ।।
जानो-जानो-जानो भाई, जाननहार हूँ जानो।
मानो-मानो-मानो भाई, आतम प्रभु है मानो।। 3।।
भाओ-भाओ-भाओ भाई, आत्म-भावना भाओ।
ध्याओ-ध्याओ-ध्याओ भाई, चित्स्वरूप को ध्याओ।। 4।।
भागो-भागो-भागो, इन्द्रिय भोगों से तुम भागो।
त्यागो-त्यागो-त्यागो भाई, मोह क्षोभ को त्यागो।। 5।।
जागो-जागो-जागो भाई, आतम हित में जागो।
पागो-पागो-पागो भाई, निजानन्द में पागो।। 6।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १२८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’