म्हारो साँचो साथी | Mharo Sa Cho Sathi

म्हारो साँचो साथी

म्हारो साँचो साथी

(छन्द - दोहा-वीर-ताटंक)
म्हारो साँचो साथी रे म्हारा महावीर है ।
मेरा सुख दाता रे मेरो महावीर है… 2
मेरो प्रभु है महान् जाके गाऊँ गुणगान-2 मेरा महावीर है ।
बोलो महावीर की जय, बोलो वीतराग की जय… ।टेक ।।
शुद्धातम और पंचगुरु जग में शरनौ दोय ।
मोह उदय जिय के वृथा आन कल्पना होय ।।
मेरो आतम है महान्, जाके गाऊँ गुणगान-2 … ।।1।।

पर का कुछ नहीं चाहता चाहूँ अपना भाव ।
निज स्वभाव में थिर रहूँ मटो सकल विभाव ।।
मेरो तारण हारा रे मेरो महावीर है… ।।2।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ६०