तर्ज : आयेंगे हम आयेंगे प्रभु दर्शन को आयेंगे …
पारसनाथ-पारसनाथ, दर्शन पाये पारसनाथ।। टेक ।।
महापुण्य का उदय सु आया, परमेश्वर का दर्शन पाया।
दर्शन करके हुआ सनाथ।। 1।।
अहो ! नाथ हो नित्य निरंजन, कर्म निकंदन, भव दुःख भंजन ।
शिव सुखदाता हे मुनिनाथ।। 2।।
परम शान्त मुद्रा अविकारी, सहज रूप भविजन मनहारी ।
धनि-धनि बालयती जगनाथ ।। 3।।
प्रभु आदर्श क्षमा के धारी, हो निरपेक्ष परम उपकारी।
दर्शायो निज चैतन्यनाथ।। 4।।
हरष-हरष कर प्रभु गुण गाऊँ, परमानन्द स्वयं में पाऊँ।
भक्तिभाव से नाऊँ माथ।। 5।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १०९ से ११०
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’