मंगलमय मंगलकरण, अहो ! मंगलमय | mamgalamaya mamgalakarana aho mamgalamaya

मंगलमय मंगलकरण, अहो ! मंगलमय ।

आनंदमय आनंदकरण, अहो ! आनंदमय ।। टेक ।।

मंगलमय अरहंत जिनेश्वर, मंगलमय श्री सिद्ध महेश्वर ।
हैं परम दिगम्बर साधु अहो ! मंगलमय ।। 1 ।।

मंगलमय जिनधर्म है जाना, रत्नत्रयमय धर्म पिछाना।
उत्तम दशलक्षण धर्म लखो मंगलमय ।। 2 ।।

मंगलमय है श्री जिनवाणी, स्वानुभूति से सहज प्रमाणी।
उत्तम अवसर पढ़ो-सुनो मंगलमय ।। 3 ।।

करो-करो अब भेद-विज्ञान, सम्यग्दर्शन हो सुखखान।
भासे शुद्धातम ही ध्रुव मंगलमय ।। 4 ।।

शुद्ध-बुद्ध चिन्मूरति आतम, परमानंदमयी परमातम ।
है स्वाधीन अखण्ड सु प्रभुता अक्षय ।। 5 ।।

हो निर्ग्रन्थ निजातम ध्याओ, कर्म-कलंक समूल नशाओ ।
रहो-रहो निर्मुक्त निराकुल निर्भय ।। 6 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २८ से २९
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’