मन्त्र जपो नवकार मनुवा, मन्त्र जपो नवकार;
पंच प्रभु को वन्दन कर लो, परमेष्ठी सुखकार ॥ टेक ॥
अरहन्तों का दर्शन करके, शुद्धातम का परिचय कर लो;
शिवसुख साधनहार मनुवा, मन्त्र जपो नवकार ॥1 ॥
सब सिद्धों का ध्यान लगालो, सिद्ध समान स्वयं को ध्यालो;
मङ्गलमय सुखकार मनुवा, मन्त्र जपो नवकार ॥2॥
आचार्यों को शीश नवाओ, निर्ग्रन्थों का पथ अपनाओ;
मुक्ति मार्ग आराध मनुवा, मन्त्र जपो नवकार ॥3 ॥
उपाध्याय से शिक्षा लेकर, द्वादशाङ्ग को शीश नवाकर;
जिनवाणी उर धार मनुवा, मन्त्र जपो नवकार ॥4॥
सर्व साधु को वन्दन कर लो, रत्नत्रय आराधन कर लो;
जन्म मरण क्षयकार मनुवा, मन्त्र जपो नवकार ॥5॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २ से ३