मैं तो परमात्म स्वरूपी हूँ
मैं तो परमात्म स्वरूपी हूँ । मैं तो शुद्धात्म स्वरूपी हूँ ।
मैं इन्द्रिय विषय कषाय रहित, पुदगल से भिन्न अरूपी हूँ ।।१।।
मैं पुण्य पाप रज से विहीन,पर से निरपेक्ष अनूपी हूँ ।
मैं निष्कलंक निर्दोष अटल, निर्मल अनंत गुणभूपी हूँ ।।२।।
मैं परम पारिणामिक स्वभावमय केवल ज्ञान स्वरूपी हूँ ।
मैं तो परमात्म स्वरूपी हूँ ।।३।।
Artist: कवि राजमल जी पवैया
स्रोत: जैन पूजांजलि (श्री रूपचन्द्र सुशीलाबाई दि. जैन ग्रंथमाला, विदिशा, १९९२), प्रारम्भिक भजन