मनुष्य जन्म अनमोल रे | Manushy Janm Anamol Re

मनुष्य जन्म अनमोल रे

मनुष्य जन्म अनमोल रे, मिट्टी में ना घोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे ।
तू सत्संग में जाया कर, गीत प्रभु के गाया कर,
शाम सवेरे बैठ के बन्दे, प्रभु का ध्यान लगाया कर,
ना लागे कुछ मोल रे, मिट्टी में ना घोल रे,
अब जो मिला है फिर न मिलेगा, कभी नहीं…
तू बुल-बुल है पानी का, मत कर मान जवानी का,
सोच संभल कर चलना रे बन्दे, पता नहीं जिन्दगानी का,
सबसे मीठा बोल रे, मिट्टी में ना घोल रे
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा, कभी नहीं…
मतलब का संसार है, इसका ना कोई एतबार है,
संभल संभल कर कदम रखो, ये फूल नहीं अंगार है,
मन की आँखें खोल रे, मिट्टी में ना घोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा, कभी नहीं…


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २८०