मेरी मैली परिणति नाथ कब निर्मल होगी
मेरी मैली परिणति नाथ कब निर्मल होगी
कब परसन्मुखता त्याग स्वसन्मुख होगी
मेरी मैली…
काल अनादि से भववासी, भ्रमता आया लख चौरासी
यह भवदुखदायी चाल मंगलमय होगी
मेरी मैली…
आपा पर का भेद ना जाना रत्नत्रय निधि ना पहिचाना
कब घर जैनागम सार समकितमय होगी
मेरी मैली…
पंच समिति और पंच महाव्रत, षट् आवश्यक सात शेषधर
तज अज्ञ विषय विष पांच मुनि बन शुद्ध होगी
मेरी मैली…
अन्तर बाहिर परिग्रह त्यागूं द्वादश विधि तप को आचारूँ
कब घर निज ध्रुव का ध्यान, ध्रुवमय ही होगी
मेरी मैली…
तेरा ज्ञानामृत रस पीकर काल अनादि का जहर फुलाकर
कब अनंतकाल को नाथ आनंदमय होगी
मेरी मैली…
छोड़ जगत् की आश वास सब, तेरी शरणा गही नाथ अब
कर नेम प्राप्त ध्वनिसार, तन्मय ही होगी ।
मेरी मैली…
स्रोत: अन्तर्ध्वनि पुष्प १ (अन्तर्ध्वनि पुष्प 1 - जैन स्वाध्याय सामग्री | Antardhvani Pushp 1)