भाई! कौन धरम हम पालें
भाई! कौन धरम हम पालें …
एक कहैं जिहि कुलमें आये, ठाकुर को कुल गा लैं ॥
भाई! कौन धरम हम पालें … ॥१॥
शिवमत बौध सु वेद नयायक, मीमांसक अरु जैना ।
आप सराहैं आतम गाहैं, काकी सरधा ऐना ॥
भाई! कौन धरम हम पालें …॥२॥
परमेसुरपै हो आया हो, ताकी बात सुनी जै ।
पूछैं बहुत न बोलैं कोई, बड़ी फिकर क्या कीजै ॥
भाई! कौन धरम हम पालें …॥२॥
जिन सब मत के मत संचय करि, मारग एक बताया ।
‘द्यानत’ सो गुरु पूरा पाया, भाग हमारा आया ॥
भाई! कौन धरम हम पालें …॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)
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