भले विराजे बाहुबली प्रभु ! भले विराजे जी | bhale viraje bahubali prabhu bhale viraje ji

तर्जः सांवलिया पारसनाथ शिखर पर …

भले विराजे बाहुबली प्रभु ! भले विराजे जी।

आत्म स्वरूप में सहज विराजे, भले विराजे जी ।। टेक ।।

तज वैभव निस्सार जगत् का, आतम वैभव पाया।
धन्य- धन्य प्रभु वीतराग, दर्शन कर हर्षाया।। 1।।

साधु दशा में अहो आपने, ऐसा ध्यान लगाया।
बेल लताएँ चढ़ी सु तन पे, चक्री शीस नवाया।। 2।।

प्रभुवर ! ऋषभदेव से पहले, तुमने शिव पद पाया।
अशरीरी हो स्वयं सिद्ध, शुद्धात्म हमें दिखाया।। 3।।

शान्त दिगम्बर सौम्य मूर्ति लख, भेदज्ञान प्रगटावें।
भक्ति भाव से भरा हृदय, प्रभु चरणों शीस नवावें ।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १३८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’