(राग मल्हार )
मेघघटासम श्रीजिनवानी। टेक॥।
स्यात्पद चपला चमकत जामें, बरसत ज्ञान सुपानी॥१॥
धरम सस्य जातैं बहु बाढ़ैं , शिवआनंदफलदानी॥२॥
मोहन धूल दबी सब यातैं, क्रोधानल सुबुझानी |॥३॥।
‘भागचन्द’ बुधजन केकीकुल, लखि हरखै चितज्ञानी |॥४॥।
रचयिता: कविवर श्री भागचंद जी जैन
Source: आध्यात्मिक भजन संग्रह (प्रकाशक: PTST, जयपुर )
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ८७