बड़े भाग्य से हमको मिला जिनधरम/जिनधर्म | Bade Bhagya Se Humko

बडे भाग्य से हमको मिला जिन धर्म,
हमारी कहानी है, तुम्हारी कहानी है, बडी बेरहम ||

अनादि से भटके चले आ रहे हैं,
प्रभु के वचन क्यूं नहीं भा रहे हैं,
रुदन तेरा भव भव में सुने कौन जन ॥(1)

भगवान् बनने की ताकत है मुझमें,
मैं मान बैठा पुजारी हूँ बस मैं,
मेरे घट में घट घट का वासी चेतन ॥(2)

अणु अणु स्वतंत्र प्रभु ने ज्ञान है कराया,
विषयों का विष पी पी उसे ना सधाया,
क्षण भर को भी तो चेतन हो जा मगन ॥(3)

Artist - अज्ञात


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २२०

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शायद! ये पं राजेन्द्र जी, जबलपुर की रचना है?

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