बडे भाग्य से हमको | Bade Bhagya Se Humko

बडे भाग्य से हमको मिला जिन धर्म,
हमारी कहानी है, तुम्हारी कहानी है, बडी बेरहम ||

अनादि से भटके चले आ रहे हैं,
प्रभु के वचन क्यूं नहीं भा रहे हैं,
रुदन तेरा भव भव में सुने कौन जन ॥(1)

भगवान बनने की ताकत है मुझमें,
मैं मान बैठा पुजारी हूं बस मैं,
मेरे घट में घट घट का वासी चेतन ॥(2)

अणु अणु स्वतंत्र प्रभु ने ज्ञान है कराया,
विषयों का विष पी पी उसे ना सधाया,
क्षण भर को भी तो चेतन हो जा मगन ॥(3)

Artist - अज्ञात

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शायद! ये पं राजेन्द्र जी, जबलपुर की रचना है?