मेरे गुरुवर ज्ञायक दर्शाय दियो रे | Mere Guruvar Jnayak Darsay Diyo Re

तर्ज : मारे ज्ञान मां ज्ञायक जणाय रह्यो रे…

मेरे गुरुवर ज्ञायक दर्शाय दियो रे।
मेरे अनुभव में प्रत्यक्ष आय रह्यो रे।।

धन्य-धन्य गुरुवर-2।। टेक ।।

आप स्वयं ज्ञायक रस रसिया,
अनुभव रस में डुबाय रह्यो रे।
किंचित् विकल्प भव्यों प्रति जागा,
ज्ञायक स्वरूप बताय दियो रे ।।।।।
नय प्रमाण युक्ति से गुरुवर,
हस्तामलकवत् दिखाय दियो रे।
परम दिगम्बर निर्ग्रन्थ गुरुवर,
सररस सागर छलकाय दियो रे।।2।।

अव्यक्त ज्ञायक शुद्धनय द्वारा,
शास्त्रों मांहि लिखाय दियो रे।
धीर गंभीर मुद्रा वाणी के द्वारा,
मुझको भी रसिया बनाय दियो रे ।।3 ।।

नमन परम उपकारी गुरुवर,
भव के दुःखों से छुडाय दियो रे।
सहजानंदमय परमानंदमय,
मुक्तिपथ में लगाय दियो रे।।4।।

नहिं प्रमत्त नहिं अप्रमत्त,
वस एक रूप ज्ञायक दिखाय रह्यो रे।
निज में ही रम जाऊँ गुरुवर,
भाव यही उमगाय रह्यो रे ।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’