बीतत ये दिन नीके, हमको
बीतत ये दिन नीके, हमको
भिन्न दरब तत्त्वनितैं धारे, चेतन गुण हैं जीके ॥ बीतत. ॥ १ ॥
आप सुभाव आपमैं जान्यो, सोइ धर्म है ठीके ॥ बीतत. ॥ २ ॥
‘द्यानत’ निज अनुभव रस चाख्यो, पर रस लागत फीके । बीतत. ॥ ३ ॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ३६
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