बीतत ये दिन नीके, हमको | Beetat Ye Din Neeke, Hamko

बीतत ये दिन नीके, हमको

बीतत ये दिन नीके, हमको
भिन्न दरब तत्त्वनितैं धारे, चेतन गुण हैं जीके ॥ बीतत. ॥ १ ॥

आप सुभाव आपमैं जान्यो, सोइ धर्म है ठीके ॥ बीतत. ॥ २ ॥

‘द्यानत’ निज अनुभव रस चाख्यो, पर रस लागत फीके । बीतत. ॥ ३ ॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ३६

खोज: Bitat Ye Din Nike, Hamko

अर्थ

आत्मरुचि होने से अब हमारे ये दिन, ये समय, भली-भाँति बीत रहे हैं। यह समय, यह देह, यह सब मुझसे भिन्न द्रव्य व तत्त्व है। चेतन गुण तो मुझ जीव का ही है। अपने स्वभाव मैंने जान लिया है, यह ही धर्म है। द्यानतराय कहते हैं कि जिसने अपने आत्मरस का आस्वादन कर लिया है, उसके लिए अन्य सभी रस - सभी आकर्षण फीके हैं।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 119।

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