म्हारी माँ जिनवाणी ऽऽऽ थारी हो जय जयकार ॥ टेक ॥
चरणों में राखी लीजो, भव से अब तारी दीज्यो।
कर दीज्यो इतनो उपकार ॥ थारी तो… ॥1 ॥
कुंदकुंद सा थारा बेटा, दुखड़ा सब जग का मेटा।
राच्यो समय को सार ॥ थारी तो… ॥2॥
जिनवाणी सुन हर्षावे, निश्चित ही भव्य कहावे।
हो जावे भव से पार ॥ थारी तो…॥3॥
तत्त्वों का सार बतावे, ज्ञायक से भेंट करावे।
कियो अनंत उपकार ॥ थारी तो… ॥4॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ६४